Contribute to Calamity Relief Fund

Several parts of Karnataka, Kerala and Maharashtra are inundated by floods. This has gravely affected life and property across. The respective governments need your support in reconstructing and restoring life back to normalcy. We encourage you to do your bit by contributing to any of these funds:

Government of India | Karnataka | Kerala | Maharashtra

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Ecology

मुंबई | मार्च 18, 2019
Photo : The Netravati River by Arjuncm3 [CC BY-SA 3.0 ], from Wikimedia Commons

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई के शोध अध्ययन के अनुसार बढ़ता शहरीकरण और बढ़ती कृषि, वर्षा जल अपवाह और मिट्टी के संचलन को बदलती है

General, Science, Ecology, Society, Deep-dive
मुंबई | जनवरी 9, 2019

जिला स्तरीय अध्ययन के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की बारिश में होने वाले बदलाव मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। 

General, Science, Ecology, Society, Deep-dive
मुंबई | जनवरी 7, 2019

विकास और योजना अधिकारियों की मदद के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई द्वारा पारिस्थितिक संवेदनशीलता के व्याख्यान के लिए अध्ययन प्रस्ताव।  

General, Science, Engineering, Ecology, Deep-dive
Bengaluru | जनवरी 3, 2019
२०१८ की चुंनिंदा प्रादेशिक कहानियां

नया साल शुरू तो हो गया लेकीन हम शायद पिछले साल के हंसीं पलों को याद कर रहे हैं। २०१८ की हमारी एक महत्त्वपूर्ण पहल थी प्रादेशिक भाषाओं में विज्ञान प्रसार। इस की वजह से सम्मोहक विज्ञान कहानियाँ भाषा की सीमाएं पर कर दूर दूर तक पहुँची। कन्नड भाषा से शुरुआत करते हुए हमने हिंदी, मराठी और असमिया में अच्छा प्रदर्शन किया। हमें आशा है कि २०१९ में हम और अच्छा प्रदर्शन करें। पेश कर रहे हैं आप के लिए कुछ प्रादेशिक रस

General, Science, Technology, Engineering, Ecology, Health, Society, Policy, Deep-dive, Featured
अक्टूबर 10, 2018

अम्लीय वर्षा आजकल एक मुख्य चर्चा का विषय है।  मानव गतिविधियों के कारण प्रदूषण में वृद्धि का प्रतिकूल प्रभाव इसका कारण है ऐसा पर्यावरण वैज्ञानिकों ने बताया है। लेकिन इंसानों के धरती पर विकसित होने से पहले भी अम्लीय वर्षा के साक्ष्य पाये गए हैं। लगभग २५ करोड वर्ष पहले साइबेरियाई क्षेत्र में ज्वालामुखी के  विस्फोट के कारण जो अम्लीय वर्षा हुई उसके कारण लगभग 90%  समुद्री और 70%  स्थलीय प्रजातियां खत्म हुई थी। अम्लीय वर्षा के कारण बड़े पैमाने पर प्रजातियों के लुप्त होने का यह पृथ्वी के इतिहास में सबसे विनाशकारी मामला था।

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