शोधकर्ताओं ने सिरेमिक आधारित शीतल-पट्टिकायें विकसित की हैं जो संगणक शीतलन में प्रयुक्त की जाने वाली ताम्र शीतल-पट्टिकाओं का स्थान लेकर लघु एवं सुसंबद्ध सर्किट बोर्ड का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।

कर्क रोग आक्रमण: मिश्रित कोशिकाएं अधिक प्रगति करती हैं

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मुंबई
20 सितंबर 2021
कर्क रोग आक्रमण: मिश्रित कोशिकाएं अधिक प्रगति करती हैं

हमारे शरीर में जीवित कोशिकाएं इसे जीवित रखने के लिए एक दूसरे के साथ सामंजस्य बिठाकर काम करती हैं। कभी-कभी, हानिकारक रसायनों या तीव्र  विकीरण के संपर्क में आने के कारण, या आंतरिक दोहराव के दौरान भी, कुछ कोशिकाओं के अंदर के जीन क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।  यदा कदा, क्षति कोशिकाओं को उनके सामान्य व्यवहार से विचलित कर देती है और असामान्य बना देती है । असामान्य कोशिकाएं संख्या में बढ़ जाती हैं और एक ऐसा दल बनाती हैं जो सीमाओं का सम्मान किये बिना स्वस्थ कोशिकाओं के लिए निर्धारित पोषक तत्वों को भी सोख लेता है। इन कोशिकाओं को हम कर्क रोग कहते हैं। धीरे-धीरे गोपनीय रूप से से ये कोशिकाएं नए क्षेत्रों पर आक्रमण करती हैं और शरीर के अन्य भागों में फैल जाती हैं। इस स्तर पर, कर्क रोग को आमतौर पर लाइलाज माना जाता है।

कर्क रोग सामूहिक रूप से उन कोशिकाओं का एक ऐसा मिश्रण होता है जिनके गुण एक दूसरे से तनिक भिन्न होते हैं। कोशिकाएं आकार और लचीलेपन या कठोरता में भिन्न होती हैं। कुछ प्रकार के कर्क रोग में, विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ एक साथ एकत्रित होकर चलती हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (आई.आई.टी. बॉम्बे) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि विभिन्न कर्क रोग कोशिकाओं के मिश्रण वाले असामान्य दल, एकरूपी कोशिकाओं वाले अनुशासित दलों की तुलना में अधिक आक्रामक होते हैं । शोधकर्ताओं ने  स्वयं के विकसित किए कंप्यूटर मॉडल चलाए और पाया कि सामान्यतः छोटी और नरम कोशिकाएं सबसे अधिक आक्रामक होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कर्क रोग स्टेम कोशिकाओं से मिलती-जुलती छोटी कोशिकाएं प्राय​: आक्रमण में सबसे  अग्रणी पाई जाती हैं। उनका अध्ययन ‘द कंपनी ऑफ बायोलॉजिस्ट्स जर्नल ऑफ सैल साइंस’ में प्रकाशित हुआ है। इस शोध कार्य को विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान बोर्ड (एस.ई.आर.बी.), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार से वित्त पोषण प्राप्त हुआ है।

हमारे शरीर की सभी कोशिकाएं प्रोटीन और अन्य रसायनों से बने मैट्रिक्स में अंतर्निहित हैं। जैसे-जैसे कर्क रोग बढ़ता है, कर्क रोग कोशिकाएं नए ऊतकों पर आक्रमण करना शुरू कर देती हैं। कोशिकाओं के लिए घने चिपचिपे मैट्रिसेस से गुजरना सरल नहीं होता है। कर्क रोग कोशिकाएं मैट्रिक्स को नरम करने और इसके माध्यम से बाहर निकलने में सहायता करने के लिए कई किण्वकों का स्राव करती हैं।

शोधकर्ताओं ने दो प्रकार के स्तन कर्क रोग कोशिकाओं को चुना जो आक्रमण के लिए  व्यग्र थे। उन्होंने विश्लेषण किया कि प्रत्येक प्रकार की कोशिका कितनी बड़ी है और प्रत्येक कोशिका अपनी पड़ोसी कोशिका से कितनी मजबूती से जुड़ी हुई है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मापा कि कोशिकाएं कितनी तेजी से आसपास घूमती हैं और वे कितनी कठोर हैं। कंप्यूटर अनुकरण का उपयोग करते हुए उन्होंने  अवलोकन किया कि कैसे ये कोशिकाएं चारों ओर घूमती हैं और शरीर के नए  भागों पर आक्रमण करती हैं। उन्होंने कोशिकाओं के आकार और कठोरता या एक दूसरे के प्रति उनकी चिपचिपाहट को नियंत्रित किया। साथ ही, अनुकरण में उन्होंने विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं को अलग-अलग अनुपात में मिलाया। उन्होंने प्रत्येक कोशिका की कुल यात्रा की गणना की। उन्होंने अवलोकन किया कि प्रत्येक कोशिका अपने मूल स्थान से कितनी दूर जाती है, जिसे कोशिका का स्थानान्तरण कहा जाता है।

प्रत्येक कोशिका द्वारा यात्रा की जाने वाली दूरी की तुलना में कोशिका स्थानान्तरण आक्रामकता का एक बेहतर संकेतक है। जिस प्रकार फुटबॉल खिलाड़ी गेंद को चारों ओर पास करने के बाद भी प्रतिद्वंद्वी की रक्षा को बेधने में असफल हो सकते हैं, उसी प्रकार कोशिकाएं भी चारों ओर घूमने के बाद भी नए क्षेत्र पर आक्रमण करने में विफल हो सकती हैं। । शोधकर्ताओं ने पाया कि कोशिका स्थानान्तरण उन समूहों में अधिकतम था जिनमें आकार और कठोरता में एक दूसरे से भिन्न कोशिकाएं उपस्थित थीं।  रोचक बात यह है कि कोशिकाओं के समूह जिनमें अकेले आकार या अकेले कठोरता में भिन्न कोशिकाएं शामिल थीं, वे बहुत कुशल आक्रमणकारी नहीं थे। उन्होंने पाया कि विभिन्न आकारों और कठोरता की कोशिकाओं का संयोजन सबसे आक्रामक संयोजन था।

शोधकर्ताओं ने कोशिकाओं के पांच अलग-अलग समूह बनाए। यह जानने के लिए कि क्या किसी विशेष आकार या कठोरता का कोई विशिष्ट संयोजन सबसे आक्रामक था, उन्होंने प्रत्येक समूह की आक्रामकता का परीक्षण किया। प्रत्येक समूह की सभी कोशिकाएँ एक समान थीं, परंतु उनका आकार या कठोरता अन्य समूहों की कोशिकाओं से भिन्न थी। उन्होंने पाया कि प्रत्येक समूह की आक्रामकता में नगण्य अंतर था।

कोशिकाओं का विषमांगी मिश्रण आक्रमण करने में इतना कुशल क्यों है? प्रदान की गई व्याख्या फ़ुटबॉल में एक बहुत ही सफल रणनीति की याद दिलाती है जिसे 'टोटल फ़ुटबॉल' कहा जाता है। डच फ़ुटबॉल टीम को 1970 के दशक में इसका अभ्यास करने के लिए जाना जाता था। गठन (फॉर्मेशन) के विपरीत, जहां खिलाड़ी निश्चित स्थिति में खेलते हैं, टोटल फ़ुटबॉल में खिलाड़ी स्वच्छंदता के साथ बढ़ते हुए दूसरे खिलाड़ी के स्थान से भी खेल सकते हैं, जिससे प्रतिद्वंद्वी के बचाव पर आक्रमण का प्रभावी दबाव बना रहता है। हम यहां कोशिकाओं के साथ जो देखते हैं वह इस रणनीति के समान है। "विषमता इस बात की  सक्षमता देती है कि समग्र रूप से चल रहे कोशिका समूह के भीतर प्रत्येक कोशिका निरन्तर स्थान बदलती रहे। इससे समस्त कोशिका समूह की कुल आक्रामकता बढ़ती है, ” डॉ सेन बताते हैं, जिनके नेतृत्व में वर्तमान शोध किया गया।

कर्क रोग के गुच्छे में कर्क रोग स्टेम कोशिकाएं होती हैं जो सामान्य स्टेम कोशिकाओं के प्रकार ही संख्या में असीमित रूप से बढ़ सकती हैं। प्रायोगिक अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि इनमें से कुछ स्टेम कोशिकाएं अपेक्षाकृत नरम और आकार में छोटी होती हैं और मोर्चे पर अग्रणी होती हैं। इन अनुकरण अध्ययनों में भी आक्रमण के अग्रणी मोर्चे पर यही छोटी कोशिकाएँ पाई गईं। समूह की कम आक्रामक कोशिकाएं इन अधिक आक्रामक नेता कोशिकाओं का अनुसरण करती हैं और आक्रमण को मजबूत करती हैं।

कहावत के अनुसार जिस प्रकार एक समूह में विविधता एक जटिल समस्या को हल करने की क्षमता प्रदान करती है, उसी प्रकार विभिन्न आकारों और कठोरता वाली कोशिकाओं का मिश्रण कर्क रोग का आक्रमण करने के लिए सबसे कुशल संयोजन है। इस विषम समूह में, आक्रमण के समय कोशिकाएं एक दूसरे के साथ अर्न्तक्रिया में रहती हैं। एक दिन हम कर्क रोग कोशिकाओं को मारने के लिए इस अर्न्तक्रिया का लाभ उठाने में सक्षम हो सकते हैं। हम इस परस्पर क्रिया में हस्तक्षेप करने और उनके आक्रमण को रोकने के लिए एक रणनीति विकसित कर सकते हैं। संभवतया तब हम आक्रमण के अंतिम चरण में भी कर्क रोग को मात देने में सक्षम हो पायेंगे।