शोधकर्ताओं ने सिरेमिक आधारित शीतल-पट्टिकायें विकसित की हैं जो संगणक शीतलन में प्रयुक्त की जाने वाली ताम्र शीतल-पट्टिकाओं का स्थान लेकर लघु एवं सुसंबद्ध सर्किट बोर्ड का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।

क्या पक्षी नगरों के बजाए देहात का शांत वातावरण पसंद करते हैं ?

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Bengaluru
30 मई 2019
क्या पक्षी नगरों के  बजाए देहात का  शांत वातावरण पसंद करते हैं ?

दुनिया भर के अनुसंधानकर्ता शहरीकरण  के जैवविविधता पर नकारात्मक प्रभाव के बारे में आगाह कर रहें हैं,  यहाँ तक कि पक्षी भी इस संकट से अछूते नहीं रहे हैं ।हाल ही में, के. टी. हेच. रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी स्वीडन, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, आरहूस यूनिवर्सिटी डेनमार्क, आई सी पी ओ ‘बॉयोलॉजिस्ट्स फॉर नेचर कंज़र्वेशन’ रूस और यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंगटन, यू एस ए ने शहरीकरण का पक्षियों की विविधता पर प्रभाव का अध्ययन किया है जो ‘जर्नल ऑफ़ ट्रॉपिकल इकोलॉजी’ में प्रकाशित किया गया।

शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन महाराष्ट्र के अमरावती नगर के इर्द गिर्द २०१० से २०१३ में जनवरी से अप्रैल याने चार महीनों तक किया। उन्होंने पक्षियों की आबादी का, ग्रामीण जंगलों से लेकर शहरी आबादी तक, पाँच क्षेत्रों में मूल्यांकन किया।

अध्ययन के दौरान, शोधकर्ताओं ने क्षेत्र की ८९ प्रजाति के  ११२,८२९ पक्षियों की पहचान की ।७३ प्रजातियों  के मामले में ग्रामीण जंगलों में सबसे अधिक विविधता पाई गई जब कि नगर के मध्य में प्रजातियों  की संख्या घटकर २९ हो गई  लेखकों ने अध्ययन क्षेत्र में पक्षियों के प्रकार का अवलोकन करने के बाद बताया, "शहरीकरण की ओर अग्रसर, पक्षियों के झुण्ड में छोटी प्रजातियों की बहुतायत पाई गई और फलभक्षी और सर्वभक्षी प्रजातियों में बढ़त देखी गई जबकि कीटभक्षी प्रजातियों में कमी पाई गई।”

एक ही क्षेत्र में और अलग अलग पक्षियों के स्थानिक संबंधों के बारे में एक ऐसे ही दूसरे अध्ययन के अनुसार, वन प्रदेश में २० प्रजाति के पक्षी ऐसे थे जो उस क्षेत्र के लिए अनन्य थे। परन्तु परिनगरीय और नगर परिसर में कोई भी अनन्य पक्षी नहीं पाया गया।शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि अध्ययन के पहले वर्ष में, इस क्षेत्र के एक विकासशील औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में वन्य क्षेत्र में एक सी विविधता थी। लेकिन  आगे के वर्षों में इस संख्या में बहुत कमी आयी। कुछ पक्षी जैसे नील कपोत और गुलाब चक्राकार तोतों ने घोंसला बनाने और भोजन की उपलब्धता का फायदा उठाया और फले फूले।

ये दोनों अध्ययन इस बात की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं कि कैसे शहरीकरण का पक्षियों की आबादी पर दुष्प्रभाव हो रहा हैं और कुछ  प्रजातियाँ तो सदा के लिए विलुप्त हो चुकी हैं। एक सकारात्मक बात ये सामने आई की शहरों में अभी भी काफी विविधता मौजूद है। ऐसे क्षेत्रों के अभिलक्षणों का अध्ययन, जो पक्षियों को आलम्बन प्रदान करते हैं और इनका नगरीय परिसर में समावेश हमें पक्षियों की आबादी बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।