आईआईटी मुंबई की लेज़र पुनर्गलन (लेज़र रीमेल्टिंग) युक्ति उत्पादन गति को कम किये बिना 3-डी प्रक्रिया में सन्निहित दोषों का निराकरण करने में सक्षम है।

Health

Bengaluru
23 अक्टूबर 2020

क्षय रोग के नाम से ही कई लोग भयभीत हो जाते हैं क्योंकि यह दुनिया भर में मृत्यु के मुख्य कारणों में से एक माना जाता है। हालाँकि अनेक औषधियों के एक साथ उपयोग से इसका उपचार संभव है, इसके जीवाणु में बढ़ती हुई औषध प्रतिरोध की शक्ति के कारण, सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संकट आ गया है। माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस नाम का जीवाणु, जिससे ये संक्रमण होता है, सबसे पहले फेफड़ों

मुंबई
9 अक्टूबर 2020

हाल ही में पेटेंट की गई स्वदेशी सीएआर-टी (CAR-T) कोशिका तकनीक भारत में मरीज़ों के लिए कैंसर का इलाज सुसाध्य करती है

Mumbai
25 सितंबर 2020

शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि कैसे तापमान, आर्द्रता (नमी ) और विभिन्न सतहों के गुण कोविड-१९ से संक्रमित श्वसन बूंदों के वाष्पीकरण दर को प्रभावित करते हैं।

Bengaluru
18 सितंबर 2020

आजकल का अदृश्य हत्यारा, वायु प्रदूषण, आज एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य के जोखिम के रूप में हमारे सामने है, जिसने निम्न और मध्यम आय वाले देशों को अधिक प्रभावित किया है। दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 अकेले भारत में ही  हैं। इसके उचित समाधान हेतु विभिन्न राज्यों में वायु प्रदूषण के स्तर और प्रभाव को समझने के लिए एक राष्ट्रव्यापी व्यापक अध्ययन आवश्यक था। “लैनसेट प्लैनेटरी हेल्थ” नामक शोध-पत्रिका में प्र

मुंबई
1 सितंबर 2020

शोधकर्ता उन आणविक घटनाओं को उजागर करते हैं, जो आमतौर पर पार्किंसन रोग में देखे जाने वाले प्रोटीन समूहों का निर्माण करते हैं।

पार्किंसन रोग एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें हमारे मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन "अल्फा-सिन्यूक्लिन" रेशा नुमा संरचनाओं में जमा हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर के अंगों में कठोरता, चलने में परेशानी होना, याददाश्त में कमी, संतुलन और तालमेल इत्यादि समस्याएँ होती हैं। इसकी असली वजह क्या हैं? ये आज भी एक रहस्य बना हुआ है, और कई शोधकर्ता इस दिशा में काम कर रहे है।

गुजरात
6 जून 2020

टीबी या क्षय रोग, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, दुनिया भर में मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। अकेले २०१७ में, दुनिया भर में १ करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित थे, और लगभग १६ लाख लोगों ने इसकी वजह से दम तोड़ दिया। कई मौजूदा दवाओं के प्रतिरोध विकसित करने वाले बैक्टीरिया के कारण, भारत जैसे देशों में यह स्थिति गंभीर हो रही है। हाल ही के एक अध्ययन में, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय, गुजरात के शोधकर्ताओं ने ट्यूबरक्लोसिस  के खिलाफ कुछ संभावित दवाओं का विकास किया है और टीबी बैक्टीरिया और अन्य रोगाणुओं के प्रतिकूल उनकी दक्षता का पर

धनबाद
15 मई 2020

एक नवीन अध्ययन के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ), धनबाद के शोधकर्ताओं ने रक्त में शर्करा की निगरानी हेतु एक प्रकाश आधारित रक्त शर्करा संवेदक विकसित किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि  यह रक्त-शर्करा (रक्त में स्थित ग्लूकोज की मात्रा) को १० से २०० मिग्रा की विस्तृत सीमा तक माप सकता है। एक स्वस्थ वयस्क के लिए खाली पेट की स्थिति में रक्त शर्करा का औसत स्तर ७० से १२० मिलीग्राम/डेसीलीटर तक होता है।

बेंगलुरु
4 मई 2020

मानवता युद्धों की गाथा के इतिहास की साक्षी रही है। हालाँकि, एक युद्ध ऐसा भी है जो रोज़ाना और लगातार होता रहता है – यह हमारे पाचक आँत में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया के है!

मुंबई
13 अप्रैल 2020

शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि कैसे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करने वाला  स्यूडोमोनास नामक जीवाणु  कार्बारिल को हज़म कर जाता  है